शनिवार, अप्रैल 04, 2009

व्यंग्य

व्यंग्य
लाउडस्पीकर वाले
वीरेन्द्र जैन
वह आता है और सबसे पहले बिजली का स्विच तलाशता है फिर ग्राहक से पूछता है कि कहाँ फिट करना है। ग्राहक उसे मंच की जगह बताता है तो वह उसके पास ही अपना डेरा जमा कर सबसे पहले स्विच से तार जोड़ लेता है। उसके पास तारों के अनगिनित टुकड़े होते हैं जो हर तरह की लम्बाई के होते हेैं, नहीं भी होते तो भी वह अपने दांतों से छील छील कर उन्हें एक के साथ दूसरे का जोड़ बना लम्बा कर लेता है। उसके तारों के जोड़ गठबंधन सरकारों को भी मात करते हैं। तार में करंट का पता वह टैस्टर से नहीं अपितु हाथ से छू छू कर लगाता है। उसके बाद वह उचित स्थान पर स्पीकर लटकाता है, उनके तार एमप्लीफायर से जोड़ता है। फिर स्टैंड को खड़ा करके उसमें माइक फिट करता है उसका स्विच खोलता है तथा उसमें से हैलो माइक टैस्टिंग वन टू थ्री, हैलो माइक टैस्टिंग वन टू थ्री, करता है और सन्तुष्ट होने पर अपने डेरे के पास पसर कर बैठ जाता है। अब तुम जानो तुम्हारा काम जाने।
भारतीय जनता पार्टी भी नेहरू परिवार के वंशज अपने स्टार नेता वरूण गांधी के आपराधिक बयानों के बारे में लगभग ऐसा ही रवैया अपना रही है। वह कह रही है कि वरूण ने क्या बोला उससे हमें मतलब नहीं है, पर पीलीभीत से हमारे उम्मीदवार वही रहेंगे। मैंने रामभरोसे से पूछा कि ये वरूण गांधी काहे के उम्मीदवार हैं!
'' लोकसभा की सदस्यता के'' उसने मेरे सवाल में कुछ बदमाशी सूंघते हुये भी उत्तर देने का अहसान किया।
'' लोकसभा में क्यों जाते हैं लोग?'' मेंने दुबारा सवाल किया।
रामभरोसे ने मुझे फिर घूरा और कहा कि ''अपने क्षेत्र की जनता की आवाज उठाने, देश के लिए कानून बनाने तथा ज्वलंत समस्याओं पर अपने व अपनी पार्टी के विचार बताने के लिये।''
'' क्या यह काम बिना बोले हुये भी हो सकता है और यदि नहीं हो सकता तो फिर जो पार्टी अपना समर्थन देकर उसे प्रत्याशी के बना संसद में भेजना चाहती है वह उसके शब्दों की जिम्मेवारी से कैसे बच सकती है!''
'' अब कोई कुछ भी कह दे तो पार्टी क्या करे'' राम भरोसे ने खांटी भाजपाइयों की तरह कुतर्क किया।
'' कार्यवाही'' मैंने कहा ''पर वहाँ कार्यवाही तो दूर उसका टिकिट भी काटने का साहस नहीं किया जा रहा है। जो एक वर्ग के हाथ और सिर काटने की बात सार्वजनिक मंच से कर रहा है वे उसका टिकिट भी नहीं काट सकते। उन्हें तो आडवाणीजी को प्रधानमंत्री बनवाने के लिए वैसे ही केवल एक वोट जुटाना है जैसे लाउडस्पीकर वाले को अपना पैसा लेना है उसमें से चाहे जो चाहे कुछ बोले उसको कोई मतलब नहीं है।''
'' यह तो अभिव्यक्ति की आजादी है'' रामभरोसे ने फिर भाजपाई कुतर्क पेश किया।
'' पर जब इसी आजादी का स्तेमाल हरेन पंडया करना चाहते हैं तो उनकी हत्या हो जाती है,उमाभारती करती हैं, कल्याणसिंह करते हेै बाबूलाल मरांडी करते हैं तपन सिकदर करते हैं, कांशीराम राणा करते हैं, मदनलाल खुराना करते हैं, शेखावत करते हैं, और जिन्ना के मामले में स्वयं आडवाणी करते हैं तो पूरा संघ परिवार लाल होकर उन्हें अध्यक्ष पद से हटा देता है। जब धर्मेंन्द्र कहते हैं कि भाजपा ने मुझे इमोशानली ब्लैकमेल किया तो उनका टिकिट काट दिया जाता है। अभिव्यक्ति की यह आजादी क्या केवल अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहर उगलने के लिए ही होती है?''
राम भरोसे बोला ''मुझे जरा काम से जाना है बाद में आकर बात करता हूँ।
वीरेन्द्र जैन
21 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड
अप्सरा टाकीज के पास भोपाल मप्र
फोन 9425674629 4

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