शनिवार, अप्रैल 18, 2009

चुनाव खर्च

व्यंग्य
रामभरोसे चुनाव सुधारकार्यक्रम
वीरेन्द्र जैन

राम भरोसे भाजपाई नेताओं के बयानों से बहुत जल्दी प्रभावित हो जाता है। कल ही कह रहा था कि ये बार बार चुनाव होना ठीक नहीं कि कभी विधानसभा के हो रहे किं कभी लोक सभा के हो रहे हैं फिर नगर निगम के हो रहे हेैं। इसमें बहुत खर्चा हो रहा है । एक बार में ही सारे चुनाव निबटा लिए जाये ंतो उत्तम रहेगा।
'' क्या तुमने देश के बारे में सोचना प्रारंभ कर दिया है?'' मैंने पूछा
'' क्यों देश के बारे में सोचने का ठेका क्या तुम्हारे अकेले के पास है?'' राम भरोसे ने कुढ कर पूछा।
'' अरे नहीं भाई मेरा यह मतलब नहीं है। वास्तव में देश के बारे में सोचना बड़े साहस का काम है वैसे बाइ दि वे क्या तुम इनकमटैक्स देते हो?''
'' मैं उस रेंज में ही नहीं आता'' वह बोला
''आते तो हो पर बचा जाते हो'' मैंने कहा
'' पर तुम अचानक मेरे ऊपर कैसे आ गये जब कि मैं चुनाव खर्च की बात कर रहा था'' वह कुढ कर बोला
मैं भी वहीं पर हूँ क्योंकि चुनाव खर्च भी वहीं से निकलता है। तुम सामान खरीदते समय बिल नहीं लेते क्योंकि दुकानदार कहता है पक्का बिल लोगे तो वैट लग जायेगा। बिजली चुराने के लिए मीटर खराब किये रहते हो। तुम्हारे मकान की कीमत रजिस्ट्री में कुछ और है, बैंक लोन लेते समय कुछ और है व प्रापर्टी टैक्स देने के लिए और है जिससे रजिस्ट्री में भी खर्चा बचाया है व प्रापर्टी टैक्स में भी बचा लेते हो पर बैंक में लोन लेने के लिए उसका दाम चौगुना हो जाता है।
'' वो तो घर चलाने के लिए सभी ऐसा कर रहे हैं''
'' मैं भी वही कह रहा हूँ कि सीधे सीधे घर चलाओ ना पर तुम देश चलाने निकल पड़ते हो''
'' हम तो अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करेंगे चाहे तुम कुछ भी कहो''
''हमें कुछ नहीं कहना है पर मेरे पास चुनाव खर्च निकालने की एक अच्छी तरकीब है''
'' तुम्हारी तरकीब अच्छी हो ही नहीं सकती फिर भी बको'' वह कहता है
'' अरे ज्यादा कुछ नहीं करना जैसे आईपीएल दिखाने के लिए टेलीविजन चैनल अधिकार खरीदते हैं वैसे ही चुनाव आयोग नेताओं के चुनावी बयानों का कापी राइट ले सकता है। जब ''कुत्ते मैं तेरा खून पी जाऊॅंगा'' पापुलर हो सकता है तो हाथ काट डालूंगा ये हाथ नहीं कमल का पंजा है पागल सरदार देश चला रहा है जिसके हर समय बारह बजे रहते हैं, छाती पर रोडरौलर चलवा देताये इसका साला है वो उसका साला है अादि ऐसे ऐसे फाइट सीन और डायलौग चल रहे हैं जो टीवी वाले मुफ्त में ही दिखा रहे हेैं और करोड़ों रूपये पीट रहे हैं जबकि इनका कापी राइट केवल चुनाव आयोग के पास होना चाहिये। यदि चुनाव आयोग अपने कलाकारों की कला का पैसा वसूलना शाुरू कर दे न केवल अपना ही खर्च निकाल सकता है अपितु उम्मीदवारों को भी चुनाव खर्च देकर कह सकता है कि करो बेटा डायलौगबाजी। अगर चुनाव के दौरान किसी इंजीनियर की चन्दा न देने पर हत्या हो जाती है, या उम्मीदवार को फाँसी देकर पेड़ पर लटका दिया जाता है या किसी विधायक की गोली मार कर हत्या कर दी जाती है तो उसके समाचार के सारे अधिकार भी चुनाव आयोग के पास होने चाहिये। ऐसा इसलिए होना चाहिये क्योंकि उन्हीं के कार्यकाल के दौरान ऐसे संवेदनशीील समाचार अस्तित्व में आते हेैं जिनके बीच में ब्रेक ले ले कर वस्तुओं के विज्ञापनों द्वारा करोड़ाें पीटे जाते हेैं तब उन समाचारों को पैदा होने का वातावरण बनाने वाले विभाग का हक क्यों मारा जाये। अगर मेरे प्रस्ताव को सरकार स्वीकार कर ले तो प्रतिवर्ष चुनाव आयेंगे और किसी को कोई दुख नहीं होगा। चुनाव की घोषणा के साथ ही घोषित कर दिया जायेगा कि चुनाव के दौरान जन्मने वाले समाचारों के सर्वाधिकार सुरक्षित हैें व बिना पूर्व अनुमति के किसी समाचार को प्रकाशाितप्रसारित करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जायेगी। चुनावी सभा करने पर प्रति श्रोता रायल्टी वसूली जाना चाहिये जिसमें से कुछ हिस्सा श्रोताओं को भी दिया जा सकता है। इसके दो फायदे होंगे, पहला तो यह कि जनता के लिए काम करने वाले व्यक्तियों पार्टियों को चुनाव के समय ही जनता के पास जाने की जरूरत नहीं रहेगी दूसरे सभाओं में भीड़ जुटाने वाली प्र्राइवेट ऐजेंसियों की जगह सरकारी आ्रकड़े उपलब्ध होंगे और पाँच हजार की भीड़ को पाँच लाख बताने वालों पर लगाम लगेगी नही ंतो उन्हें पाँच लाख की रायल्टी चुकाना पड़ेगी। तब पाँच हजार पूड़ी के पैकिटों का आर्डर देकर प्रैस पाँच लाख की भीड़ बताने के लिए नहीं कहा जा सकता। वोटर पर्चियों और चुनाव प्रचार के पर्चों पर प्राइवेट कम्पनियों के विज्ञापन छपवाये जा सकते हैं।
अब तुम्हें कहाँ तक बतायें राम भरोसे कि इस उर्वर दिमाग योजनाओं के कारखाने चल रहे हैं पर क्या करें दिल्ली ऊॅंचा सूनती है।
वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड
अप्सरा टाकीज के पास भोपाल मप्र फोन 9425674629

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